Friday, February 18, 2011

सज्जन पुरुषों के दर्शन से क्या लाभ मिलता है?

                            साधनाओ से भी बढकर हमारे जीवन में एक बात की अवशाकता है , वो है सज्जन पुरुषों, संतों, साधू-सन्यासियों के दर्शन! जो साधना सिद्धि से भी बढकर है! इन साधू-सन्यासियों के दर्शन मात्र से हि सदगाती प्राप्त हो जाती है! जो इश्वर से भी बढकर है!
                               साधू वह है जीसमे क्षमा, सहेंशिलता और  निस्वार्थ भावना है! ऐसे संत पुरुषों का दर्शन आजकल वर्तमान में दुर्लभ है! तो प्रश्न उठता है की सज्जन पुरुषों के दर्शन से क्या  लाभ मिलता है?
                             एक बार नारद के मन में यह प्रश्न उठा! तो उन्होंने ब्रम्हा के पास जाकर प्रश्न किया की , प्रभु सज्जन पुरुषों के दर्शन से क्या  लाभ मिलता है? तो ब्रम्हा जी कुछ देर तक सोचते रहें और बोले इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं है! आप जाकर भगवान शंकर से पुछो! भगवान शंकर से भी नारद मुनि निराश होकर भगवान विष्णु के पास गयें! उनसे भी नारद जी ने वहीँ सवाल किया. प्रभु सज्जन पुरुषों के दर्शन से क्या लाभ मिलता है?
                                 भगवान विष्णु मुस्कुराकर बोले  काशी में गंगा नदी के किनारे कीचड़ में एक केचुआ है! उससे जाकर अपना सवाल पुछो !
                                नारदजी भी काशी में केंचुए के पास पहुँच गये! और उससे भी उन्होंने वहीँ  सवाल किया! केंचुए ने नारदजी का सवाल सुना और नारद जी को आंख भर देखा और प्राण त्याग दिया ! तो नारदजी पछताते हुए विष्णु के पास पहुंचे ! विष्णु भगवान नारद जी को बोले की आपको आपके प्रश्न का उत्तर अब साल भर के बाद मिलेगा ! नारद जी भी जिद पकड़कर थे की किसी भी हालत में वो इस प्रश्न का उत्तर जानकर ही रहेंगे!
                             साल भर बाद नारदजी को विष्णु ने यमुना किनारे विचरण कर रहें एक नाग को ये सवाल करने को कहां! नाग ने भी नारदजी का सवाल सुन कर उनको आंख भरकर देखा और प्राण त्याग  दिया!
                           अब नारद जी झुझला उठे! और भगवान विष्णु के पास पहुंचे ! उन्होंने सालभर बाद फिर से नारद जी को आने को खाकर उन्हें विदा किया! सालभर बाद भगवान विष्णु ने नारद जी को  काशी के रजा के घर जन्मे नवजात बालक राजकुमार को ये सवाल करने को कहा! नारद जी भयभीत हो गये की प्रश्न को सुनते ही यदि इस बार राजकुमार मर गया तो मेरी खैर नहीं! राजा मुझे नहीं छोड़ेगा! परन्तु भगवान के आदेश पर वो उनके घर गये! बच्चे से मिलने की इच्छा व्यक्त की! राजा ने उन्हें आदरपूर्वक बच्चे तक पहुँचाया!
                                                  उस बच्चे को जन्मे हुयें मात्र छः घंटे हुए थे!
              नारद जी ने बच्चे से वहीँ प्रश्न किया - हे बालक ! सज्जन पुरुषों के दर्शन से क्या लाभ होता है!
                           उस बालक ने नारद जी को प्रणाम किया और कहां की हे मुनिवर ! में एक केंचुआ था! आपके दर्शन को प्राप्त कर में उस अधम योनी से मुक्ति प्राप्त कर सर्प योनी में गया! उसमें भी आपके दर्शन का अवसर मुझे मिला ! जिसका परिणाम ये हुवा की में  नाग योनी से छुटकारा पाकर अभी मानव योनी में  राजा के घर जनम लिया हूँ! इसमें भी आपके दर्शन हो गयें हैं! जिसके फलस्वरूप संपूर्ण सुखों का उपभोग करके इस योनी से भी मुक्ति पाकर मं वैकुण्ठ धाम जाऊंगा!
                                                 नारद जी को उनके प्रश्नों का उत्तर मिल गया था !
            तो सज्जन पुरुष इश्वर के सामान होते हैं! जिनके दर्शन से कलयुग में भी हम भवसागर पार लगा सकते है!                                                         !! जय लक्ष्मी माता !!

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